जीन अभियान में आपका स्वागत है

जीन अभियान एक जमीनी संगठन है। आज भारत के 17 राज्यों में जीन अभियान काम कर रहा है। डॉ सुमन सहाय और कुछ खाद्य-सुरक्षा के लिए चिन्तित लोगों के द्वारा 1993 में जीन अभियान की शुरुआत हुई थी। जीन अभियान को “किसान और समाज के अधिकार” “बौद्धिक सम्पत्ति अधिकार” “स्वदेशीय ज्ञान” “जीन संसोधन के आहार और पैदावार” “जैव संसाधन” जैसे मुद्दों पर शोध और वकालत संगठन के रूप में देश-दुनिया में पहचाना जाता है।

जी.एम. फसलों में नये मापदंडों की जरुरत -सौरव मिश्रा

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने पहली बार २२ सितंबर २००६ को अपने अन्तरिम आदेश में देशभर में सभी प्रकार के जीन संवर्धित (जी.एम.) फसलों के खेत परीक्षण पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही उन्होंने नियामक प्रणाली को भी खरी-खोटी सुनाई है।
इसका यह अर्थ हुआ कि केन्द्रीय पर्यावरण व वन मंत्रालय के अंतर्गत नियामक प्राधिकारी जीव संवर्धित अनुमोदन कमेटी (जी.ई.ए.सी.) अब न्यायालय के अंतिम आदेश के आने तक किसी भी जीन संवर्धित फसल के खेत परीक्षण की अनुमति नहीं दे सकती । यह आदेश अर्थशास्त्री अरुणा रोड्रिग्स और अन्य विशेषज्ञों की एक जनहित याचिका पर दिया गया है। याचिकाकर्ताआं में से एक विशेषज्ञ देवेन्दर शर्मा ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि जी.एम. नियामक में आमूलचूल परिवर्तन लम्बे समय से टल रहा था। Read More

 

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